शिवानी सिंह
नई दिल्ली।
भारत और रूस के तकनीकी तालमेल से तैयार हो रही पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का शुरुआती मॉडल (प्रोटोटाइप) इस साल के अंत यानी दिसंबर तक पटरियों पर टेस्टिंग के लिए उतर सकता है। सभी तरह के सुरक्षा मापदंडों और तकनीकी परीक्षणों में पास होने के बाद, अगले वर्ष मुसाफिर इस प्रीमियम ट्रेन में यात्रा का आनंद ले सकेंगे।
35 साल तक मेंटेनेंस का रहेगा जिम्मा
रेल मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, भारत की आरवीएनएल और रूस की दिग्गज टीएमएच (टीएमएच) कंपनी के जॉइंट वेंचर ‘काइनेट रेलवे सॉल्यूशंस’ को 120 स्लीपर वंदे भारत (कुल 1,920 कोच) बनाने का ठेका मिला है। इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत लगभग 14,400 करोड़ रुपये है। इस करार की सबसे खास बात यह है कि आगामी 35 वर्षों तक इन आधुनिक ट्रेनों के रख-रखाव और देखभाल की जिम्मेदारी भी इसी इंडो-रशियन वेंचर की होगी।
लातूर फैक्टरी में चल रही है तैयारी
महाराष्ट्र के लातूर स्थित मराठवाड़ा रेल कोच फैक्टरी को अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुसार रोबोटिक वेल्डिंग और नई असेंबली लाइनों से लैस किया जा रहा है। पहला 16 डिब्बों वाला प्रोटोटाइप यहीं से तैयार होकर परीक्षण के लिए आरडीएसओ को सौंपा जाएगा। ट्रेन का ट्रायल 110 से 180 किमी प्रति घंटे की गति से किया जाएगा, जिसमें स्वचालित दरवाजे, ‘कवच’ सुरक्षा प्रणाली और केबिन के अंदर के साउंड इन्सुलेशन की जांच की जाएगी। ट्रायल के सफल होने के लगभग छह महीने बाद इसे आम यात्रियों के लिए शुरू किया जाएगा।
हवाई जहाज जैसा लग्जरी अहसास और आधुनिक सुविधाएं
इस ट्रेन के अंदर यात्रियों को प्लेन जैसा माहौल और सुविधाएं मिलेंगी:
प्रथम श्रेणी (एसी-1): यात्रियों की सुविधा के लिए गर्म पानी के शावर और अधिक प्राइवेसी वाले केबिन
हाई-टेक केबिन: यूरोपियन स्टाइल वाली टच-स्क्रीन केबिन कंट्रोलिंग और एम्बिएंट लाइटिंग।
अन्य फीचर्स: सेंसर वाले ऑटोमैटिक दरवाजे, साउंड-प्रूफ केबिन, बायो-वैक्यूम टॉयलेट और रियल-टाइम जीपीएस डिस्प्ले।
रूसी तकनीक से मिलेगी झटका-मुक्त और शांत यात्रा
ट्रांस-साइबेरियन ट्रेनों का निर्माण करने वाली रूसी कंपनी टीएमएच अपनी विशेष बोगी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है। इससे 160 किमी प्रति घंटे की तेज गति में भी ट्रेन के भीतर कंपन और शोर बेहद कम रहेगा, जिससे सफर पूरी तरह से आरामदायक और झटका-मुक्त होगा।