नई दिल्ली, शिवानी सिंह
केंद्र सरकार एक देश एक वाहन नियम की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाने जा रही है। इसमें नौकरीपेशा और बार-बार ट्रांसफर होने वाले लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। सरकार के नए प्रस्ताव के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति अपने निजी वाहन को किसी दूसरे राज्य में ले जाता है, तो उसे 3 साल तक वहां नया रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (आरसी) लेने या टैक्स चुकाने की जरूरत नहीं होगी।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मौजूदा मोटर वाहन अधिनियम की धारा 47 के तहत यह समयसीमा अभी केवल 12 महीने (1 साल) की है। इस अवधि के बीतने के बाद वाहन मालिक को स्थानीय परिवहन विभाग (आरटीओ) के चक्कर काटने पड़ते हैं और भारी-भरकम रोड टैक्स दोबारा चुकाना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि इस नए नियम का सबसे बड़ा लाभ मध्यम वर्ग और कामकाजी आबादी को मिलेगा। इसमें आईटी, बैंकिंग और अन्य निजी क्षेत्रों में काम करने वाले लोग, जिनका ट्रांसफर अक्सर 2 से 3 साल के लिए दूसरे शहरों में होता है। वहीं, केंद्रीय एवं राज्य कर्मचारी जैसे रक्षा बल, अर्धसैनिक बल, केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक और अन्य सरकारी कर्मचारी जो अक्सर एक राज्य से दूसरे राज्य भेजे जाते हैं। जो छात्र बीटेक, एमबीए या मेडिकल जैसे 3-4 साल के कोर्स के लिए दूसरे राज्यों में अपनी गाड़ी ले जाते हैं।
अधिकारी के मुताबिक भारत में हर साल लगभग 15 लाख से 20 लाख ऐसे लोग होते हैं जो रोजगार, व्यवसाय या शिक्षा के कारण अंतर-राज्यीय प्रवास करते हैं। वर्तमान में इनमें से एक बहुत छोटा हिस्सा ही वैध तरीके से गाड़ी ट्रांसफर करा पाता है, क्योंकि मौजूदा प्रक्रिया बेहद जटिल है। इस नियम के आने से इन लाखों वाहन मालिकों को सीधे तौर पर आरटीओ की एनओसी (एनओसी) लेने और टैक्स रिफंड के झंझट से मुक्ति मिल जाएगी।
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राज्यों के राजस्व पर क्या पड़ेगा असर:
इस प्रस्ताव को लेकर कुछ राज्यों ने चिंता जताई है, क्योंकि इससे उनके राजस्व पर सीधा असर पड़ सकता है। जब कोई वाहन किसी राज्य में पंजीकृत होता है, तो वह 15 साल का एकमुश्त रोड टैक्स मूल राज्य को देता है। यदि वह वाहन 3 साल किसी दूसरे राज्य की सड़कों पर चलता है, तो दूसरे राज्य को उसका कोई रोड टैक्स नहीं मिलेगा। इससे खासकर उन राज्यों को नुकसान हो सकता है जो रोजगार के बड़े केंद्र (जैसे कर्नाटक, महाराष्ट्र, दिल्ली-NCR) हैं, जहाँ लोग बाहर से गाड़ियां लेकर आते हैं।
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समाधान की तलाश:
केंद्र सरकार इसके लिए एक डिजिटल मैकेनिज्म (वाहन पोर्टल) विकसित करने पर विचार कर रही है, ताकि यदि कोई वाहन 1 साल से ज्यादा किसी दूसरे राज्य में रहे, तो मूल राज्य द्वारा वसूले गए टैक्स का एक हिस्सा आनुपातिक आधार पर उस राज्य को ट्रांसफर किया जा सके।
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सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सचिव वी. उमाशंकर ने हिंदुस्तान से कहा कि उपरोक्त प्रस्ताव है। ट्रांसपोर्ट मंत्रियों के एक उच्च स्तरीय समूह के सामने रखे गए इस नए प्रस्ताव का उद्देश्य इसी कागजी औपचारिकता समाप्त कर मध्यव वर्ग को सहूलियत प्रदान करना है।
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