नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
आधुनिकीकरण की पटरी पर दौड़ रही भारतीय रेल ने पटरियों की सुरक्षा और रखरखाव के लिए अब पारंपरिक तरीकों को बदलने का फैसला किया है। रेलवे जल्द ही एडवांस्ड स्वायत्त रेलवे इंस्पेक्शन रोबोट्स तैनात करने जा रही है। यानी अब पटरियों की निगरानी ट्रैकमैन नहीं बल्कि एआई रोबोट्स करेंगे। यह तकनीक रेल हादसों को शून्य पर लाने और दुर्गम परिस्थितियों में काम करने वाले गैंगमैन के जीवन को सुरक्षित बनाने में मील का पत्थर साबित होगी। शुरुआत में यह योजना उत्तर भारत के ट्रंक रूट्स पर लागू होगी।
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में पटरियों की निगरानी मैनुअल गश्त के जरिए होती है। अक्सर ट्रेन हादसों की वजह पटरियों के अंदर आने वाली वो अदृश्य दरारें होती हैं, जो सर्दियों में सिकुड़न के कारण बनती हैं और इंसानी आंख से नहीं दिखतीं। नया रोबोटिक सिस्टम पूरी तरह एआई और थर्मल इमेजिंग तकनीक से लैस होगा। ये स्वायत्त रोबोट विशेष चुंबकीय ग्रिप के जरिए पटरी पर दौड़ने के बजाय, उससे कुछ मिलीमीटर ऊपर हवा में तैरते हुए आगे बढ़ेंगे। इससे आम ट्रेनों के परिचालन में कोई बाधा नहीं आएगी। यह रोबोट अल्ट्रासोनिक तरंगों के जरिए पटरियों का अंदरूनी एक्स-रे करेगा। इसमें लगे हाई-डेफिनिशन नाइट-विज़न कैमरे स्लीपर्स और फास्टनरों की लाइव तस्वीरें सीधे कंट्रोल रूम को भेजेंगे। घने कोहरे या कड़कड़ाती ठंड में, जहां इंसानों के लिए काम करना जोखिम भरा होता है, वहां ये रोबोट बिना रुके रात भर मुस्तैदी से जांच कर सकेंगे।
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रोबोटिक सिस्टम ट्रैकमैनों का जीवन रक्षा कवच होगा:
भारी ठंड, कोहरे और भीषण गर्मी में ट्रैकमैन भारी औजार लेकर रोज कई किलोमीटर पैदल चलते हैं। इस दौरान हर साल लगभग 200 ट्रैकमैन ट्रेनों की चपेट में आकर जान गंवा देते हैं। यह रोबोटिक सिस्टम गैंगमैन (ट्रैकमैन) और कीमैन सहित संरक्षा वर्ग के लगभग 4,00,000 कर्मचारियों के लिए सुरक्षा कवच बनेगा। नई तकनीक के तहत रोबोट द्वारा भेजे गए रीयल-टाइम डेटा और जीपीएस लोकेशन के आधार पर ट्रैकमैन की टीम केवल चिन्हित स्पॉट पर जाकर तुरंत मरम्मत का काम करेगी।
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स्विट्जरलैंड के रोबोटिक डॉग), चीन के आरआईआईएस सीरीज और जर्मनी के गेको रोबोट्स विदेशों में पहले ही खुद को साबित कर चुके हैं। भारतीय रेलवे भी अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल कई डिवीजनों में इसके प्रोटोटाइप का परीक्षण कर रही है। प्रथम चरण में इन्हें माल ढुलाई वाले रूट्स (डीएफसी) और उन हाई-स्पीड रूट्स (दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हावड़ा) पर तैनात किया जा रहा है, जहां वंदे भारत जैसी ट्रेनें 130 से 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ती हैं।
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