शिवानी सिंह
नई दिल्ली, 4 अक्टूबर।
वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था में बदलने के राष्ट्रीय लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने देश के बुनियादी ढांचे के कायाकल्प की एक व्यापक योजना तैयार की है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और नीति आयोग के संयुक्त रोडमैप के तहत देश भर में 2.3 लाख किलोमीटर लंबा अत्याधुनिक राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क निर्मित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के अंतर्गत एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे और नए एक्सप्रेसवे बनाए जाएंगे, जिससे देश के मुख्य शहरों के बीच आवाजाही में लगने वाले समय में 30 से 40 प्रतिशत तक की बड़ी कटौती दर्ज की जाएगी।
सड़क परिवहन मंत्रालय, नीति आयोग, एनएचएआई और एनएचएआईडीसीएल के शीर्ष अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय बैठक में इस नीतिगत योजना के प्रारूप को स्वीकृति प्रदान की गई। अधिकारियों के अनुसार, यह विशाल बुनियादी ढांचा देश के आर्थिक विकास को नई रफ्तार देने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा। 2.3 लाख किलोमीटर लंबे इस नेटवर्क के आसपास नए औद्योगिक कॉरिडोर, लॉजिस्टिक्स पार्क और एग्रो-प्रोसेसिंग जोन स्थापित किए जाएंगे, जिससे छोटे शहरों और कस्बों में निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद बड़े स्तर पर आजीविका के साधन उपलब्ध होंगे। यात्रा का समय घटाने के लिए नए रूट अलाइनमेंट, जीएनएसएस आधारित सैटेलाइट टोलिंग और स्मार्ट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को लागू किया जाएगा।
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सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) और एनएचएआई के एक संयुक्त अध्ययन के मुताबिक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस सेंसर, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) और आधुनिक सड़क सुरक्षा मानकों के प्रयोग से सड़क हादसों में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी आने की संभावना है। इसके अतिरिक्त, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए देश के प्रमुख बंदरगाहों, हवाई अड्डों और कृषि मंडियों को सीधे 4 और 6-लेन एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना है, ताकि कृषि उत्पाद बिना किसी व्यवधान के शीघ्रता से बाजारों तक पहुंच सकें।
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महानगरों को जाम और प्रदूषण से राहत देने के लिए बनेगी अर्बन डी-कंजेशन पॉलिसी
नए मास्टर प्लान के तहत दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे प्रमुख महानगरों को ट्रैफिक जाम से मुक्त कराने के लिए एक नई शहर जाम-मुक्त नीति लागू की जाएगी। इसके तहत अंतर-राज्यीय भारी वाणिज्यिक वाहनों और डीजल ट्रकों को शहरों की सीमाओं पर ही रोकने का खाका तैयार किया गया है। इसके लिए शहर के बाहरी हिस्सों में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क (एमएमएलपी) और कंजेशन-फ्री जोन विकसित किए जाएंगे। बाहरी राज्यों से गुजरने वाले भारी वाहनों को रिंग रोड, बायपास और एलिवेटेड कॉरिडोर के माध्यम से सीधे निकाला जाएगा, जबकि माल की अनलोडिंग शहर की सीमा के बाहर बने लॉजिस्टिक्स हब्स में ही होगी। भारी वाहनों के शहर में प्रवेश न करने से महानगरों के वायु प्रदूषण स्तर में भी भारी गिरावट आने की उम्मीद है।
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