भारत के 192 वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर में लागू होगा पेंच कान्हा मॉडल

हाईवे पर रफ्तार के साथ सुरक्षित होगी वन्यजीवों की जिंदगी

नई दिल्ली, अरविंद सिंह
देश में बुनियादी ढांचे के विस्तार और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन साधते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों का ढांचा बदलने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इससे राजमार्गों पर वाहनों की रफ्तार और वन्यजीवों की जिंदगी का संघर्ष हमेशा के लिए थम जाएगा। सरकार ने देशभर के 192 अति-संवेदनशील वाइल्ड लाइफ कॉरिडोर में पेंच-कान्हा मॉडल की तर्ज पर इको-डक्ट्स और वाइल्डलाइफ अंडरपास बनाना अनिवार्य कर दिया है। नई नीति देशभर के मौजूदा व भविष्य के सभी बुनियादी ढांचा परियोजना पर लागू होगी।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) द्वारा डिजाइन किए गए इस मॉडल को अब केंद्र सरकार की नई स्मार्ट ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर नीति का आधार बनाया गया है। इसके तहत सख्त नो-क्लियरेंस पॉलिसी लागू की गई है, जिसके अनुसार भविष्य में बनने वाली किसी भी सड़क परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर का ब्लूप्रिंट न होने पर वन मंजूरी प्रदान नहीं की जाएगी।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनएच-44 के पेंच-कान्हा कॉरिडोर पर 5 वर्षों के व्यापक कैमरा-ट्रैपिंग अध्ययन में अभूतपूर्व परिणाम सामने आए हैं। 2018 से पहले इस मार्ग पर औसतन हर साल 40 से अधिक बड़े वन्यजीव सड़क हादसों में मारे जाते थे। हालांकि, इको-अंडरपास, साउंड व लाइट बैरियर और लाल रंग की डामर लागू होने के बाद हादसों में 85 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है।
ध्ययन के मुताबिक, 90 प्रतिशत से अधिक वन्यजीवों ने हाईवे के ऊपर आने के बजाय नीचे बने 9 समर्पित अंडरपास से गुजरना सीख लिया है। 5 सालों में 21 से अधिक प्रजातियों ने इसे अपना सुरक्षित रास्ता बनाया, जिनमें पेंच के 31 से अधिक व्यक्तिगत बाघ शामिल हैं। शाकाहारी जीव गौर, सांभर, चीतल, नीलगाय आदि 55 फीसदी, मांसाहारी जीव बाघ, तेंदुआ, भालू, जंगली कुत्ते और सियार 35 प्रतिशत, छोटे स्तनधारी जीव सिवेट कैट, रस्टी-स्पॉटेड कैट और खरगोश 10 फीसदी इनका उपयोग कर रहे हैं।
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देश के चिन्हित प्रमुख संवेदनशील कॉरिडोर :
राजाजी-कॉर्बेट कॉरिडोर (उत्तराखंड): शिवालिक पहाड़ियों के बीच हाथियों और बाघों की सुरक्षित आवाजाही के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण।
दुधवा-कातरनियाघाट-किशनपुर कॉरिडोर (उत्तर प्रदेश): नेपाल सीमा से लगे तराई आर्क लैंडस्केप में बाघों, एक सींग वाले गैंडों और बारहसिंगा का मुख्य आवास।
रणथंभौर-मुकुंदरा हिल्स कॉरिडोर (राजस्थान): दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे क्षेत्र में बाघों व तेंदुओं के लिए एशिया के पहले 8-लेन वाइल्डलाइफ ओवरपास का निर्माण अंतिम चरणों में।
काजीरंगा-कारबी आंगलोंग कॉरिडोर (असम): हाथियों और गैंडों के सुरक्षित आवागमन के लिए 35 किलोमीटर लंबा देश का सबसे बड़ा एलिवेटेड इको-वायाडक्ट निर्माणाधीन।
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विदेशों में वन्यजीवों की सुरक्षा के मॉडल :
कनाडा (बैंफ नेशनल पार्क): ट्रांस-कनाडा हाईवे पर 6 ओवरपास और 38 अंडरपास बनाए गए हैं, जिससे ग्रिजली भालू और भेड़ियों के हादसों में 80 प्रतिशत से अधिक की कमी आई।
नीदरलैंड्स (नटुर्ब्रुक): 600 से अधिक इको-ब्रिज का निर्माण। यहाँ स्थित 800 मीटर लंबा नटुर्ब्रुक ज़ैंडपोइर्ट दुनिया का सबसे लंबा इको-ब्रिज है।
ऑस्ट्रेलिया (क्रिसमस आइलैंड): हर साल लाखों लाल ककेड़ों के प्रवासन के लिए विशेष क्रैब ब्रिज और अंडरपास बनाए गए हैं।
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