नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
भारत के नेशनल हाईवे और एक्सप्रेस-वे की अधिकतम गति सीमा मौसम के मिजाज के हिसाब से बदलेगी। देश में पहली बार बारिश, धूलभरी आंधी-तूफान, कोहरा अथवा खराब मौसम होने पर एक्सप्रेस-वे की स्पीड 60-80 किमी प्रतिघंटा घटाने का निर्णय लिया गया है। हालांकि साफ मौसम में कारें हाईवे पर कानूनी गति अधिकतम 100 और एक्सप्रेस-वे पर 120 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार पर फर्राटा भर सकेंगी। ध्यान रहे, खराब मौसम में कानूनी स्पीड लिमिट का पालन नहीं करने पर ई-चालान सीधे मेल पहुंच जाएगा।
सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने इस मानसून में चुनिंदा नेशनल हाईवे व एक्सप्रेस-वे पर डायनमिक स्पीड लिमिट लागू करने जा रहा है। इस तकनीक में हाईवे पर जगह-जगह अत्याधुनिक विजिबिलिटी सेंसर और वेदर स्टेशन लगाए गए हैं। मौसम का रूख भांपकर सेंसर तुरंत एनएचएआई मुख्य ट्रैफिक मैनेजमेंट सेंटर (कंट्रोल रूम) को भेज देते हैं। यहां से रीयल-टाइम में उस हाईवे से गुजरने वाली गाड़ियों की कार स्क्रीन, सड़कों पर लगे बड़े डिजिटल बोर्ड और ड्राइवरों के मोबाइल तक अलर्ट पहुंचा देता है ताकि वाहन धीमी रफ्तार पर चलें।
जियो-फेंसिंग तकनीक की मदद से हाईवे के प्रभावित इलाकों के आसपास एक वर्चुअल बाउंड्री बनाई जाएगी और वाहन के इस दायरे में आते ही स्थानीय टेलीकॉम टावर से ड्राइवर के फोन पर तुरंत एक सुरक्षा अलर्ट मैसेज पहुंच जाएगा। यह सामान्य एमएमएस से कहीं तेज तरीका होगा।
इसमें सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा, इसमें फोन में इंटरनेट होना जरूरी नहीं है। आपदा प्रबंधन और भूकंप के ट्रायल की तरह प्रभावित इलाके के सभी मोबाइलों पर एक साथ एक तेज बीप या वार्निंग टोन के साथ यह मैसेज फ्लैश हो जाएगा। इस तकनीक के लागू होने से अब खराब मौसम और घने कोहरे में भी सफर करने वाले लोग पहले से कहीं ज्यादा सुरक्षित रहेंगे और समय रहते दुर्घटनाओं को टाला जा सकेगा।
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मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि पहले चरण में इसे देश के सबसे आधुनिक और संवेदनशील एक्सप्रेसवे—दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे और उत्तर प्रदेश के गंगा एक्सप्रेसवे के कुछ चिन्हित पैच पर प्रायोगिक तौर पर शुरू किया जा रहा है। इस पायलट प्रोजेक्ट के नतीजों और सॉफ्टवेयर की बारीकियों को सुधारने के बाद, अगले साल के मध्य तक इसे देश के सभी प्रमुख ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और दुर्घटनाओं के लिहाज से संवेदनशील ब्लैक-स्पॉट वाले नेशनल हाईवे पर पूरे देश के स्तर पर अनिवार्य रूप से लागू कर दिया जाएगा।
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सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 1.5 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवाते हैं, जिनमें से लगभग 17 प्रतिशत हादसे (करीब 25,000 मौतें) केवल खराब मौसम के दौरान विजिबिलिटी कम होने की वजह से होते हैं।
आईआईटी (IIT) के विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए सिमुलेशन मॉडल के अनुसार डायनेमिक स्पीड लिमिट और रीयल-टाइम कार-स्क्रीन अलर्ट सिस्टम लागू होने के बाद, एक्सप्रेसवे पर होने वाले हादसों और हाईवे से फिसलने से होने वाली दुर्घटनाओं में 70 से 80 फीसदी तक की कमी आएगी।
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मौसम के मिजाज को देखकर स्पीड लिमिट तय करने की यह तकनीक विदेशों में, खासकर जर्मनी के मशहूर ऑटोबान और यूरोपीय देशों के हाई-टेक एक्सप्रेसवे पर बेहद सफल रही है। वहां खराब मौसम में रफ्तार को घटाकर हादसों को लगभग शून्य के स्तर पर ला दिया गया है।
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