अनिल सिंह चौहान
नई दिल्ली, 1 अक्तूबर।
सड़कों पर सन्नाटे के साथ दौड़ने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) के कारण होने वाले हादसों पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र सरकार ने सख्त कदम उठाया है। 1 अक्टूबर से देश में बिकने वाली सभी नई इलेक्ट्रिक गाड़ियों में ‘अकॉस्टिक व्हीकल अलर्टिंग सिस्टम’ (एवीएएस) यानी ध्वनि चेतावनी प्रणाली का होना अनिवार्य कर दिया गया है। अब ऑटोमोबाइल कंपनियां शो-रूम से केवल वही ईवी बेच सकेंगी, जिनमें यह सुरक्षा फीचर लगा होगा। साइलेंट इंजन के खतरे को देखते हुए उठाया गया यह कदम पैदल यात्रियों की सुरक्षा को और पुख्ता करेगा।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के मुताबिक, यह तकनीक गाड़ियों के धीमी रफ्तार में होने पर एक बनावटी (आर्टिफिशियल) आवाज पैदा करती है, जिससे आसपास चल रहे लोगों को गाड़ी के आने का संकेत मिल जाता है। जब तक ईवी 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार तक रहेगी, तब तक यह सिस्टम खुद-ब-खुद आवाज निकालेगा। गाड़ी की स्पीड इससे ऊपर जाते ही टायरों और हवा के घर्षण से प्राकृतिक आवाज आने लगती है, इसलिए यह सिस्टम अपने आप बंद हो जाता है।
यह नया सुरक्षा नियम सिर्फ यात्री कारों या बसों (एम कैटेगरी) और व्यावसायिक मालवाहक गाड़ियों (एन कैटेगरी) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें ई-रिक्शा और ई-कार्ट को भी शामिल किया गया है। वर्तमान में सड़कों पर दौड़ रहे पुराने ईवी मॉडल्स के मालिकों और कार निर्माताओं को भी राहत देते हुए 1 अक्टूबर 2027 तक का समय दिया गया है, जिसके भीतर उन्हें अपनी गाड़ियों में यह साउंड सिस्टम इंस्टॉल कराना होगा।
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बुजुर्गों और दृष्टिबाधितों के लिए जीवनरक्षक साबित होगी तकनीक
इलेक्ट्रिक वाहन बिना किसी इंजन साउंड के चलते हैं। ऐसे में आवासीय कॉलोनियों, पार्किंग एरिया, स्कूल जोन और संकरे बाजारों में बुजुर्गों, बच्चों और विशेष रूप से दृष्टिबाधित लोगों को पीछे से आती गाड़ी का अहसास नहीं हो पाता, जिससे हादसे का जोखिम काफी बढ़ जाता है। नया एवीएएस सिस्टम इस खतरे को पूरी तरह खत्म कर देगा।
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जेब पर मामूली असर, सुरक्षा में बड़ा सुधार
ईवी की संख्या: देश में अब तक 86 लाख से ज्यादा इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हो चुके हैं।
तकनीक की लागत: वाटरप्रूफ स्पीकर और साउंड जनरेटर वाली इस तकनीक को जोड़ने से प्रति वाहन करीब 1,500 से 3,500 रुपये का ही अतिरिक्त खर्च आएगा।
वैश्विक मानक: इस कदम से भारतीय ऑटो उद्योग सुरक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानकों के समकक्ष खड़ा हो सकेगा।
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