शिवानी सिंह
नई दिल्ली।
दिल्ली की 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले करीब 45 लाख लोगों को संपत्तियों का मालिकाना हक दिलाने की प्रक्रिया को आसान और समयबद्ध बनाया गया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री-अनधिकृत कॉलोनियां दिल्ली आवास अधिकार योजना के तहत इन कॉलोनियों के पात्र निवासियों को मालिकाना हक दिलाने के लिए सर्वेक्षण से लेकर हस्तांतरण विलेख जारी करने तक की प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा तय की गई है।
इसके तहत भौगोलिक सूचना प्रणाली सर्वेक्षण सात दिनों के भीतर, आवेदन में पाई गई कमियों का निवारण 15 दिनों के भीतर और हस्तांतरण विलेख 45 दिनों के भीतर जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार आवेदन प्रक्रिया 24 अप्रैल 2026 से शुरू की गई थी।
1,731 में से 1,511 कॉलोनियों का नियमितीकरण
केंद्र सरकार के फैसले के तहत दिल्ली की 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1,511 को स्वीकृत लेआउट योजना की अनिवार्यता के बिना ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमित किया जाएगा। इसका उद्देश्य उन निवासियों को संपत्ति से जुड़े अधिकार दिलाना है, जिनके पास लंबे समय से घर होने के बावजूद औपचारिक मालिकाना दस्तावेज नहीं थे।
इस व्यवस्था के तहत इन कॉलोनियों में मौजूदा निर्मित संरचनाओं को भी ‘जहां है, जैसा है’ के आधार पर नियमितीकरण के दायरे में लाया जाएगा। स्वीकृत लेआउट योजना का अभाव अब नियमितीकरण में बाधा नहीं बनेगा।
मालिकाना हक के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
पात्र निवासी ऑनलाइन माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। जिन मामलों में पहले से संपत्ति का हस्तांतरण विलेख या अधिकार पर्ची जारी हो चुकी है, उनके लिए आवेदन प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। राजस्व विभाग, दिल्ली विकास प्राधिकरण और नगर निगम के समन्वय से आवेदनों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
31 मार्च तक करीब 40 हजार हस्तांतरण विलेख जारी
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 31 मार्च 2026 तक प्रधानमंत्री-अनधिकृत कॉलोनियां दिल्ली आवास अधिकार योजना के तहत करीब 40 हजार हस्तांतरण विलेख और अधिकार पर्चियां जारी की जा चुकी थीं। सरकार के अनुसार पहले स्वीकृत लेआउट योजनाओं के अभाव में कई निवासी अपने मकानों की निर्माण योजना स्वीकृत कराने या मौजूदा निर्माण को नियमित कराने में कठिनाई का सामना कर रहे थे।
कुछ कॉलोनियां नियमितीकरण के दायरे से बाहर
सभी अनधिकृत कॉलोनियां इस व्यवस्था के दायरे में नहीं आएंगी। आरक्षित या अधिसूचित वन क्षेत्र, संरक्षित स्मारक और पुरातात्विक क्षेत्र, यमुना का बाढ़ क्षेत्र, सड़कों की निर्धारित भूमि, उच्च तनाव विद्युत लाइन वाले क्षेत्र और कानून के तहत संरक्षित भूमि पर स्थित कॉलोनियां अपवादों में शामिल हैं।
