शिवानी सिंह
नई दिल्ली।
भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों का अब एक अत्याधुनिक डिजिटल अवतार तैयार किया जाएगा। केंद्र सरकार यूरोप और चीन जैसे उन्नत देशों की तर्ज पर देश के 1.46 लाख किलोमीटर लंबे नेशनल हाईवे नेटवर्क को ‘डिजिटल ट्विन’ (वर्चुअल मॉडल) में बदलने जा रही है। एआई, इसरो के उपग्रहों और सेंसर आधारित इस तकनीक के जरिए हाईवे पर दुर्घटनाओं की रोकथाम, ट्रैफिक प्रबंधन और सड़क रखरखाव को नई दिशा मिलेगी।
सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 2028 तक देशभर में पूर्ण रूप से लागू करने की समयसीमा तय की है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, इसरो और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय की साझा पहल से हाईवे की एक रियल-टाइम डिजिटल कॉपी तैयार की जाएगी। सड़कों पर लगे आईओटी (IoT) सेंसर, ड्रोन, वाहनों के डैशकैम और सैटेलाइट से प्राप्त आंकड़ों को एआई एल्गोरिदम के माध्यम से प्रोसेस किया जाएगा। इससे कंट्रोल रूम में बैठकर ही सड़क पर होने वाली हर गतिविधि, गड्ढों की स्थिति, गाड़ियों के दबाव और मौसमी असर का पल-पल का अपडेट मिलता रहेगा।
इस योजना के प्रारूप को इसी माह (अक्तूबर) में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजा जाना है। कैबिनेट की मोहर लगते ही इसे पहले चुनिंदा एक्सप्रेसवे पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा। दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम, 24 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट। इस डिजिटल निगरानी व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में देखने को मिलेगा।
ब्लैक स्पॉट्स की पहचान: एआई तकनीक गाड़ियों की रफ्तार और ट्रैफिक पैटर्न का अध्ययन कर 92 फीसदी सटीकता के साथ दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर सकेगी।
पूर्वानुमान: खराब मौसम या किसी अन्य खतरे से लगभग 24 घंटे पहले ही सिस्टम अलर्ट जारी कर देगा।
त्वरित आपातकालीन सेवा: किसी दुर्घटना या सड़क पर रुकावट की स्थिति में एआई तुरंत ऑटोमैटिक संदेश भेजेगा, जिससे किसी के सूचित करने से पहले ही आपातकालीन सहायता मौके पर पहुंच जाएगी।
जाम से मिलेगी राहत, यात्रा का समय होगा आधा
रियल-टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट से एक्सप्रेसवे और हाईवे पर लगने वाले लंबे जाम से मुक्ति मिलेगी। आंकड़ों के अनुसार, इस तकनीक से।
वाहनों की औसत गति में 46% से 62% तक की वृद्धि संभव है।
यात्रा में लगने वाले समय में 28% से 48% तक की कमी आएगी।
वैश्विक स्तर पर कहां खड़ा है भारत?
डिजिटल रोड्स के मामले में यूरोपीय संघ और यूके ने 2018-19 में ही ‘डिजिटल रोड्स फ्रेमवर्क’ की शुरुआत कर दी थी। वहीं, चीन ने वर्ष 2021 से अपनी 14वीं पंचवर्षीय योजना के तहत शहरी यातायात और एक्सप्रेस-वे पर इसे बड़े पैमाने पर लागू किया। अब भारत भी इस तकनीक को अपनाकर वैश्विक मानकों वाले स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर की श्रेणी में शामिल होने जा रहा है।
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