पटरियों पर गैंगमैन नहीं तोड़ेंगे दम, सैटेलाइट कवच करेगा सुरक्षा

जंगलों-सुरंगों में भी नहीं टूटेगा नेटवर्क, स्मार्ट वॉच देगी एडवांस अलार्म

नई दिल्ली, अरविंद सिंह
सुरक्षित ट्रेन परिचालन की ज़िम्मेदारी निभा रहे रेलवे के लाखों ट्रैकमैन (गैंगमैन) की ज़िंदगी की हिफ़ाज़त के लिए एक अत्याधुनिक सैटेलाइट सेफ्टी मॉडल तैयार कर लिया गया है। पटरियों की देखभाल और मरम्मत में तैनात इन संरक्षा कर्मचारियों की कलाई पर बंधी सैटेलाइट-बेस्ड स्मार्ट सेफ्टी वॉच 1.5 किलोमीटर दूर से ही तीव्र वाइब्रेशन और अलार्म के ज़रिए आने वाली ट्रेन का सटीक अलर्ट दे देगी। यह आधुनिक डिवाइस न केवल बीप साउंड से कर्मचारी को सचेत करेगी, बल्कि इसकी डिजिटल स्क्रीन पर यह भी स्पष्ट दिखाई देगा कि ट्रेन किस पटरी (अप लाइन-डाउन लाइन) से आ रही है। इससे दुरूह और जोखिम भरे इलाकों में मेंटेनेंस के दौरान होने वाले जानलेवा हादसों पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी।

रेलवे मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह नई स्मार्ट वॉच डबल-अलर्ट प्रणाली पर काम करती है। जैसे ही कोई ट्रेन 1500 मीटर के दायरे में प्रवेश करेगी, कलाई पर बंधी वॉच तीव्र वाइब्रेशन के साथ 85 डेसिबल क्षमता का बीप साउंड उत्पन्न करेगी। इससे भारी बारिश अंधड़ या मेंटेनेंस के शोर-शराबे में भी कर्मचारी तुरंत सतर्क हो सकेगा। उन्होंने बताया कि पुराने जीपीएस रक्षित्र डिवाइस की सबसे बड़ी खामी उनका मोबाइल सिम-नेटवर्क (2जी-4जी) पर निर्भर होना था। पहाड़ों, घुमावदार मोड़ों और सुरंगों में सिग्नल गायब होने से हादसे हो जाते थे। नया मॉडल सीधे सैटेलाइट लिंक से जुड़ा है। इसके अलावा इसमें इमरजेंसी एसओएस बटन और रीयल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग भी दी गई है, जिससे किसी आपात स्थिति में कंट्रोल रूम को तुरंत सटीक लोकेशन मिल सकेगी।
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अधिकारी ने बताया कि यह कोई साधारण स्मार्टवॉच नहीं, बल्कि एक रग्ड और अत्यधिक टिकाऊ पर्सनल सेफ्टी गियर है। यह शॉकप्रूफ और वॉटरप्रूफ है, जो धूल, मिट्टी और भारी बारिश में भी खराब नहीं होगी। कलाई पर बंधने के कारण ट्रैकमैन के दोनों हाथ भारी काम करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र रहेंगे।
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रेलवे के आंकड़ों के अनुसार 2018 से 2023 के बीच पटरियों पर काम के दौरान ट्रेन से कटकर 361 रेलवे कर्मचारियों-ट्रैक मेंटेनर्स की मौत हुई है। ज़ोनल रेलवे में सर्वाधिक मौतें सेंट्रल रेलवे (44), नॉर्दर्न रेलवे (40) और नॉर्थ सेंट्रल रेलवे (31) में हुईं। वहीं राज्यों के स्तर पर उत्तर प्रदेश (61) और महाराष्ट्र (48) सबसे अधिक प्रभावित रहे हैं। अन्य जोनों में 225 हादसे हुए।
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अधिकारी ने बताया कि वर्तमान में कुछ जोनल सबसे चुनौतीपूर्ण सेक्शनों पर इसका इंटरनल फील्ड ट्रायल चल रहा है। आरडीएसओ द्वारा ट्रायल डेटा की अंतिम समीक्षा के बाद अक्टूबर 2026 के अंत तक  रेलवे बोर्ड इसका आधिकारिक सर्कुलर जारी कर सकता है। प्रथम चरण में घने नेटवर्क और जोखिम भरे इलाकों में तैनात 1 लाख से अधिक ट्रैकमैन को इस स्मार्ट सेफ्टी वॉच से लैस किया जाएगा। रेलवे में लगभग तीन लाख गैंगमैन हैं।