जानें क्यों ट्रेन में महंगा खाना चुन रहे हैं मुसाफिर…..
अनिल सिंह चौहान
नई दिल्ली ।
भारतीय रेल में सफर के दौरान खान-पान के ढर्रे में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। अब ट्रेन यात्री सिर्फ पेट भरने से ज्यादा भोजन की शुद्धता, हाइजीन और स्वाद को तवज्जो दे रहे हैं। यही वजह है कि पारंपरिक पेंट्री व्यवस्था की तुलना में अधिक कीमत होने के बावजूद ई-कैटरिंग (ऑनलाइन ऑर्डरिंग) का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है।
ई-कैटरिंग की ओर क्यों बढ़ रहा है यात्रियों का रुझान?
शिकायतों में बड़ी कमी: ताजा आंकड़ों के अनुसार, पारंपरिक कैटरिंग सेवाओं की तुलना में ई-कैटरिंग के जरिए मंगाए गए भोजन को लेकर बेहद कम (15 से 20 प्रतिशत) शिकायतें मिलती हैं।
क्वालिटी और हाइजीन: पेंट्री कार और वेंडरों के खाने की गुणवत्ता, ओवरचार्जिंग और स्वच्छता को लेकर लगातार उठते सवालों के कारण यात्री अब ऑनलाइन लोकप्रिय ब्रांड्स से भोजन मंगवाना सुरक्षित मान रहे हैं।
प्रीपेड मील से तौबा: लगभग 25 से 30 प्रतिशत मुसाफिर अब टिकट बुक करते समय रेलवे का प्रीपेड मील लेने से परहेज करने लगे हैं।
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आईआरसीटीसी का बढ़ा राजस्व, ई-कैटरिंग का हो रहा विस्तार
यात्रियों की इस नई पसंद का असर रेलवे के राजस्व पर भी साफ नजर आ रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान दैनिक डिलीवरी का आंकड़ा बढ़कर 1.65 लाख पार कर गया, जो पिछले वर्ष से लगभग 37.5 प्रतिशत अधिक है। इसके अलावा, डिलीवरी देने वाले स्टेशनों का दायरा भी 70 से बढ़कर 200 से अधिक हो चुका है। चालू वित्तीय वर्ष (2026-27) की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में कैटरिंग सेगमेंट से लगभग 732 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
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स्वच्छता पर सख्ती और तकनीक का सहारा
रेलवे प्रशासन ने बेस किचन और पेंट्री कार में सफाई व्यवस्था मजबूत करने के लिए एआई (एआई) कैमरों से लाइव मॉनिटरिंग शुरू की है। इसके अलावा, नियमों का उल्लंघन करने वाले वेंडरों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ लाइसेंस रद्द करने जैसी कार्रवाई भी की गई है।
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2027 तक का लक्ष्य और आगामी योजनाएं
स्टेशन नेटवर्क: ई-कैटरिंग सुविधा को देश भर के 600 से अधिक रेलवे स्टेशनों तक पहुंचाने की योजना है।
डिलीवरी टार्गेट: प्रतिदिन 2.5 लाख से अधिक भोजन पैकेट डिलीवर करने का लक्ष्य रखा गया है।
ई-पेंट्री का विस्तार:ऑन-बोर्ड ई-पेंट्री व्यवस्था को 100 से ज्यादा ट्रेनों में लागू किया जाएगा।
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