हाईवे पर नींद-थकान को ‘बीप’ से भगाएगी एआई तकनीक 

सरकारी बस-ट्रक चालकों के लिए बनेगा नया 'सुरक्षा कवच'
नई दिल्ली, अतुल सिंह- सोनू
स्टेयरिंग संभालते ही अब थकान और झपकी का डर इतिहास बनने जा रहा है। भारतीय सड़कों पर आए दिन होने वाले भीषण हादसों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार एक नया एआई-आधारित ‘स्मार्ट सुरक्षा कवच’ तैयार कर रही है। अब जैसे ही किसी बस या ट्रक ड्राइवर को गाड़ी चलाते समय झपकी आएगी या उनका ध्यान भटकेगा, वाहन में लगी आधुनिक एआई तकनीक एक तेज ‘बीप’ की आवाज और सीट में कंपन पैदा कर चालक को तुरंत सावधान कर देगी। देश के विभिन्न हिस्सों में किए गए सफल परीक्षणों में इस तकनीक की मदद से हादसों में करीब 40 फीसदी तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसी सफलता को देखते हुए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने इसे चरणबद्ध तरीके से देशभर के सभी नए व्यावसायिक वाहनों में अनिवार्य करने का फैसला किया है।
मंत्रालय के आधिकारिक रोडमैप के अनुसार, दिसंबर 2026 तक एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम (एडीएएस) और ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम (डीएमएस) जैसी सुरक्षा तकनीकों का परीक्षण और उनके मानक तय करने का काम पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद 1 अक्टूबर 2027 से सभी नई कमर्शियल बसों और ट्रकों में एडवांस्ड इमरजेंसी ब्रेकिंग और इलेक्ट्रॉनिक स्टेबिलिटी कंट्रोल अनिवार्य कर दिया जाएगा। वहीं, 1 जनवरी 2028 से देश के सभी नए व्यावसायिक वाहनों में एआई कैमरे, लेन डिपार्चर वार्निंग और ब्लाइंड स्पॉट इंफॉर्मेशन सिस्टम को अनिवार्य रूप से लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश और बिहार में एनएचएआई के सहयोग से इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम भी लागू किया जा रहा है।
यह पूरी सुरक्षा प्रणाली दो स्तरों पर काम करती है। पहला स्तर वाहन के बाहर की परिस्थितियों पर नजर रखता है, जिसमें बंपर और विंडशील्ड पर लगे कैमरे व रडार सड़क की लेन और आगे चल रहे वाहनों की दूरी को मापते हैं और आपात स्थिति में ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकिंग लागू करते हैं। वहीं दूसरा स्तर कैबिन के भीतर चालक पर नजर रखता है। इसमें स्टीयरिंग के पास लगा इंफ्रारेड एआई-कैमरा सीधे ड्राइवर के चेहरे और आंखों की पलकों की गतिविधियों को ट्रैक करता है। जैसे ही चालक को झपकी या थकान महसूस होती है, यह अलार्म बजाकर और सीट वाइब्रेट करके उसे फौरन अलर्ट कर देता है। भारत में अक्सर चालक 12 से 16 घंटे लगातार गाड़ियां चलाते हैं, जो थकान और दुर्घटनाओं का मुख्य कारण बनता है। वर्ष 2023 में दर्ज कुल 4.61 लाख से अधिक सड़क हादसों में लगभग 25 प्रतिशत हादसे व्यावसायिक वाहनों से हुए थे, जिनमें 45,000 से अधिक लोगों ने जान गंवाई थी। यह नई तकनीक ऐसे हादसों में निर्णायक कमी लाने का काम करेगी।
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जमीन पर दिखे एआई तकनीक के शानदार नतीजे
महाराष्ट्र के नागपुर में जब सरकारी बसों में यह एआई-आधारित डिवाइस लगाए गए, तो बिना तकनीक वाली बसों की तुलना में हादसों में 41 प्रतिशत की सीधी कमी आई। इसी तरह, हैदराबाद और अन्य प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों पर तेलंगाना की 200 बसों पर किए गए अध्ययन में रियल-टाइम अलर्ट तकनीक के कारण गंभीर हादसों में 40 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। इन परीक्षणों के दौरान एडवांस अलर्ट मिलने से 65 प्रतिशत चालकों ने आगे चल रहे वाहनों से सुरक्षित दूरी बनाए रखी, जिससे चालकों के दुर्घटना जोखिम स्कोर में 30 प्रतिशत तक का सुधार देखा गया।
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ग्लोबल बनाम इंडियन स्टैंडर्ड – क्या है अंतर?
यूरोपीय संघ में जुलाई 2024 से ही सभी नए कमर्शियल वाहनों में ड्राइवर मॉनिटरिंग सिस्टम को पूरी तरह अनिवार्य किया जा चुका है। वहां ड्राइविंग नियमों का कड़ाई से पालन होता है और कोई भी चालक लगातार 4.5 घंटे से अधिक गाड़ी नहीं चला सकता। इसके लिए वहां हर वाहन के डैशबोर्ड पर इलेक्ट्रॉनिक लॉगिंग डिवाइस लगा होता है जो सीधे सरकारी सर्वर से जुड़ा रहता है। भारत में भी अब जनवरी 2028 तक इसी तर्ज पर कड़े सुरक्षा मानक लागू करने की तैयारी है ताकि थकान के कारण होने वाले जानलेवा हादसों पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।