नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
यदि आप सोचते हैं कि भारतीय रेल में सिर्फ तेज रफ्तार वंदे भारत या बुलेट ट्रेन के सपने ही बुने जाते हैं, तो ठहरिए। इन आधुनिक यात्री ट्रेनों को सुरक्षित पटरियों पर दौड़ाने के लिए आज भी साइकिल की अहम भूमिका है। रेलवे के ट्रैकमैन देश के सुदूर क्षेत्रों की पटरियों की निगरानी व रखरखाव का काम पूरा करने के लिए साइकिल पर सवार होकर जाते हैं। इसके लिए रेलवे बाकायदा उन्हें हर माह साइकिल मेंटेनेंस अलाउंस (सीएमए) देती है।
इसी कड़ी में रेलवे बोर्ड ने 12 सितंबर 2026 को ईस्ट कोस्ट रेलवे (ईसीआर) के करीब 22 हजार से अधिक ट्रैक मेंटेनरों के लिए साइकिल मेंटेनेंस अलाउंस का भुगतान बकाया (एरियर) सहित मंजूर कर दिया है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के बाद इस भत्ते को समाप्त करने के बजाय बरकरार रखा गया था और जुलाई 2017 से इसकी दर को 90 से बढ़ाकर 180 प्रति माह कर दिया गया।
अधिकारी ने बताया कि भारतीय रेलवे के सभी 17 जोन में यह व्यवस्था लागू है। इनमें नॉर्दर्न रेलवे, वेस्टर्न रेलवे, सेंट्रल रेलवे, ईस्टर्न रेलवे, ईस्ट कोस्ट रेलवे और नॉर्थ सेंट्रल रेलवे समेत सभी प्रमुख जोन शामिल हैं। दिल्ली डिविजन सहित कई जोन में लंबे समय से यह बकाया अटका हुआ था, जिसके चलते कर्मचारियों ने
श्रम मंत्रालय को अपनी आपत्ति दर्ज करायी है। जिससे उन्हें यह भत्ता मिला। आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे में ट्रैक मेंटेनर (ग्रुप डी) के कुल 22,200 से अधिक पद हैं। कर्मचारी को अपने मुख्यालय से 8 किमी के दायरे में आधिकारिक कार्य के लिए साइकिल का उपयोग करना होता है। यह भत्ता अधिकतम 2 साल की अवधि के लिए मंजूर होता है।
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साइकिल को एक विलासिता माना जाता था :
ब्रिटिश शासनकाल (1853-1947) में रेलवे कर्मचारियों को साइकिल भत्ता नहीं दिया जाता था। उस दौर में साइकिल को एक विलासिता माना जाता था और निचले स्तर के कर्मचारियों के लिए ऐसे भत्तों का प्रावधान नहीं था। वर्ष 1923 में मद्रास सरकार ने पुलिस सब-इंस्पेक्टर के लिए 25 के घोड़े भत्ते को हटाकर 5 का साइकिल भत्ता शुरू किया। यह रेलवे के लिए नहीं था।
साइकिल मेंटेनेंस अलाउंस पूरी तरह से स्वतंत्र भारत की देन है। वर्तमान में 22 हजार से अधिक रेल कर्मी साइिकल पर सवार होकर पटरियों की निगरानी कर रहे हैं।
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भत्ते की शुरुआत और मील के पत्थर:
18 सितंबर 2008 (6ठा वेतन आयोग): रेलवे ने आधिकारिक तौर पर पहली बार 90 प्रति माह की दर से साइकिल मेंटेनेंस अलाउंस शुरू किया। 1 जुलाई 2017 (7वां वेतन आयोग) ने दर को दोगुना करके 180 प्रति माह किया गया।
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