हाईवे के सुरक्षा उपकरणों  की खराबी पर कंपनियों पर रोजाना 120 फीसदी जुर्माना

प्रत्येक घटना पर लगेगा एक लाख का अतिरिक्त आर्थिक दंड
CCTV

traffic cctv is working transfer imformation to traffic control on highway

नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे पर सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी के लिए लगाए गए उपकरणों के खराब रहने या सही समय पर मरम्मत न होने पर अब संबंधित कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, यदि ट्रैफिक कैमरे, सेंसर, डिजिटल सूचना बोर्ड या स्पीड डिटेक्शन सिस्टम खराब मिलते हैं या तय समयसीमा से अधिक बंद रहते हैं, तो कंपनी पर प्रति उपकरण, प्रति दिन की सेवा-दर का 120 फीसदी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। इसके अलावा, सेवा-स्तर संबंधी आवश्यकताओं (एसएलआर) की अवहेलना करने पर प्रति घटना 1 लाख रुपये का अलग से दंड देना होगा। बार-बार लापरवाही बरतने पर ठेका रद्द करने का भी प्रावधान किया गया है।
मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, हाईवे को सुरक्षित बनाने के लिए लागू एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) केवल औपचारिक नहीं, बल्कि 24 घंटे यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली प्रणाली है। इसके तहत ट्रैफिक मॉनिटरिंग कैमरे, वीडियो इंसिडेंट डिटेक्शन सिस्टम, डिजिटल मैसेज बोर्ड, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रीडर, स्पीड डिटेक्शन उपकरण और आपातकालीन संचार नेटवर्क लगाए गए हैं।
यह एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम सड़क यात्रियों को मुख्य रूप से तीन स्तरों पर सुरक्षा प्रदान करता है। सबसे पहले, हाईवे पर दुर्घटना, वाहन खराब होने, गलत दिशा में चलने, धुंध या सड़क पर पड़े अवरोध का तुरंत पता लगाया जाता है। दूसरे स्तर पर, कंट्रोल रूम से तुरंत एंबुलेंस, हाईवे पेट्रोलिंग गाड़ी, क्रेन और पुलिस को मौके पर भेजा जाता है। तीसरे स्तर पर, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड और मोबाइल प्लेटफॉर्म के जरिए आगे चल रहे वाहन चालकों को सड़क की स्थिति का अलर्ट भेज दिया जाता है।

——–

बॉक्स
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस तकनीक के क्रियान्वयन के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। उदाहरण के तौर पर, बेंगलुरु-मैसूर छह-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे पर ATMS लागू होने के बाद मौतों में भारी गिरावट आई। वर्ष 2023 में जहां दुर्घटनाओं में 188 लोगों की जान गई थी, वहीं 2024 में यह संख्या घटकर केवल 50 रह गई। कंपनियों की ओर से संचालन व रखरखाव में बरती जा रही ढिलाई को खत्म करने के लिए ही 17 सितंबर को यह नई एसओपी जारी की गई है।