नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान
भारतीय रेलवे अब ट्रेन यात्रा के दौरान टिकट आवंटन व्यवस्था को पूरी तरह से भ्रष्टाचार-मुक्त और हाई-टेक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है। आने वाले दिनों में आरएसी और वेटिंग लिस्ट के यात्रियों को खाली सीटों के लिए टीटीई की मिन्नतें नहीं करनी पड़ेंगी और न ही किसी तरह की सिफारिश की जरूरत होगी। रेलवे एक ऐसा आधुनिक डिजिटल सिस्टम लागू कर रहा है, जो ट्रेन में खाली हुई बर्थ को इंसानी दखल के बिना खुद-ब-खुद वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को आवंटित कर देगा।
इस नई व्यवस्था के तहत जैसे ही कोई यात्री ट्रेन में सवार नहीं होता, टीटीई को अपने 4जी हैंडहेल्ड टर्मिनल (एचएचटी) डिवाइस पर उसकी अनुपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसके तुरंत बाद रेलवे का केंद्रीय सर्वर एक्शन में आ जाएगा और प्राथमिकता सूची के अनुसार वेटिंग या आरएसी में सबसे आगे खड़े यात्री के नाम पर वह खाली सीट अपने आप ट्रांसफर कर देगा। इस पारदर्शी प्रक्रिया से यात्रियों को लाइव ट्रैकिंग की सुविधा भी मिलेगी। अब यात्री खुद अपने मोबाइल पर ‘रेल मदद’ या आईआरसीटीसी ऐप के जरिए यह देख सकेंगे कि ट्रेन के किस डिब्बे में और किस स्टेशन से कितनी सीटें खाली हैं।
इसके साथ ही, टिकट चेकिंग अमले को भी अत्याधुनिक सुरक्षा और ट्रैकिंग गैजेट्स से लैस किया जा रहा है। टीटीई को मिलने वाली नई डिवाइस में 5 मीटर तक सटीक जीपीएस ट्रैकिंग, 12 घंटे चलने वाली बैटरी और बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट अटेंडेंस जैसे फीचर्स होंगे। इतना ही नहीं, ऑन-ड्यूटी सुरक्षा के लिए टीटीई को बॉडी-वॉर्न एचडी कैमरा और आपातकालीन एसओएस बटन से लैस स्मार्ट जैकेट दी जाएगी, ताकि किसी भी मेडिकल या सुरक्षा संबंधी इमरजेंसी में सीधे कंट्रोल रूम और अगले स्टेशन मास्टर को अलर्ट भेजा जा सके।
अगर कोई टीटीई जानबूझकर डिवाइस पर खाली सीट की जानकारी अपडेट नहीं करता है, तो यात्री 139 हेल्पलाइन या ऐप पर शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जिसकी जांच जीपीएस डेटा और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड से की जाएगी। इस योजना की शुरुआत दिसंबर 2026 में मुंबई सेंट्रल डिवीजन की चुनिंदा ट्रेनों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर होगी, जबकि अप्रैल 2027 तक इसे देश के सभी 17 रेलवे जोनों में पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। रेलवे का मानना है कि इस कदम से टिकट चेकिंग की कार्यकुशलता 40 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी और भ्रष्टाचार की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी।