नई दिल्ली, शिवानी सिंह
दिल्ली-वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) कॉरिडोर को धरातल पर उतारने की प्रक्रिया तेज हो गई है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने इस 865 किमी लंबे कॉरिडोर की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर रेल मंत्रालय को पहले ही सौंप दी है। अब परियोजना को गति देने के लिए शीर्ष स्तर पर अधिकारियों की तैनाती की जा रही है।
रेलवे बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश में बुलेट ट्रेन परियोजनाओं के क्रियान्वयन में जुटे एनएचएसआरसीएल ने वरिष्ठ टेक्नोक्रट्स की नियुक्ति के लिए 7.9.2026 को दो अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की हैं। इसमें प्रतिनियुक्त पर तीन ओएसडी व तीन एजीएम स्तर के अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी। जोकि दिल्ली, वाराणसी और पटना के साथ नोएडा-नई दिल्ली, आगरा और लखनऊ जैसे प्रमुख शहरों में बैठकर परियोजना का संचालन व समन्वय देखेंगे।
विभाग ने भारतीय रेलवे के पात्र वरिष्ठ अधिकारियों से आवेदन मांगे हैं। अधिकारियों की नियुक्ति 30 दिन में की जाएगी जिससे परियोजना से जुड़ी गतिविधियों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सके। इसके पश्चात एनएचएसआरसीएल बड़े पैमाने पर विभिन्न पदों पर भर्तियां करेंगा। मालूम हो कि मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल के बाद दिल्ली और पूर्वी भारत को जोड़ने वाले हाई स्पीड नेटवर्क की दिशा में दिल्ली-पटना-सिलीगुड़ी कॉरिडोर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
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दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर की डीपीआर समीक्षा और अलाइनमेंट (मार्ग) मंजूरी अंतिम चरण में है। रूट में अयोध्या को शामिल किए जाने के कारण रेलवे बोर्ड इसके अलाइनमेंट की गहन समीक्षा कर रहा है। इस कॉरिडोर में नोएडा (जेवर एयरपोर्ट), मथुरा, आगरा, इटावा, कानपुर, लखनऊ, रायबरेली, प्रयागराज, अयोध्या और वाराणसी जैसे प्रमुख स्टेशनों का प्रस्ताव है। फिलहाल रेल मंत्रालय और नीति आयोग द्वारा परियोजना की लागत, वित्तीय व्यवहार्यता और फंडिंग मॉडल का मूल्यांकन किया जा रहा है, जिसके बाद इसे केंद्रीय मंत्रिमंडल की अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।
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