स्विट्जरलैंड की तर्ज पर कश्मीर घाटी में बनेगा हाई-टेक मेगा हब

जोजिला टनल के पास सोनमर्ग और द्रास के बीच वैश्विक कन्वेंशन सेंटर-रिसॉर्ट बनाने का खाका तैयार

नई दिल्ली, शिवानी सिंह
धरती का स्वर्ग कही जाने वाली कश्मीर घाटी को विश्व पटल पर एक नई और वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। सरकार स्विट्जरलैंड के दावोस और यूरोप के आल्प्स पहाड़ों की तर्ज पर सोनमर्ग और द्रास के बीच एक
विश्व स्तरीय टूरिस्ट कन्वेंशन सेंटर और विंटर रिसॉर्ट बनाने की महत्वाकांक्षी योजना का खाका तैयार कर रही है। कश्मीर और लद्दाख को हर मौसम में जोड़ने वाली विश्व की सबसे ऊंची निर्माणाधीन जोजिला टनल के दोनों छोरों पर बनने जा रहा यह मेगा प्रोजेक्ट न केवल पर्यटन बल्कि वैश्विक व्यापार के लिहाज से एशिया का एक बड़ा केंद्र बनेगा। यहाँ दुनिया भर के राजनेता, कॉर्पोरेट दिग्गज और वैज्ञानिक एक साथ बैठकर मंथन कर सकेंगे।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सोनमर्ग (बालटाल) और द्रास (मीनामार्ग) के बीच इस मेगा प्रोजेक्ट का विस्तार सैकड़ों एकड़ जमीन पर किया जाएगा। इस बाबत केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (एलएएचडीसी) के अधिकारियों के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक में सहमति बन चुकी है।

चर्चाओं का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि तीनों ही पक्ष जल्दबाजी में पर्यावरण या स्थानीय संस्कृति से कोई समझौता नहीं करना चाहते। बैठक में लद्दाख के छठे शेड्यूल की चिंताओं और स्थानीय जनजातीय पहचान को पूरी तरह सुरक्षित रखने पर सहमति बनी है। इसके अलावा लद्दाख और कश्मीर प्रशासन के बीच जमीन ट्रांसफर के नियमों को पारदर्शी और विवाद-मुक्त रखने की रूपरेखा भी तय की गई है।
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पर्यावरण सुरक्षा: जमीन बिकेगी नहीं, लीज पर मिलेगी
नो-कंक्रीट पॉलिसी: सोनमर्ग और द्रास के अत्यधिक संवेदनशील (इको सेंसिटिव जोन) होने के कारण यहाँ भारी कंक्रीट के होटलों पर रोक रहेगी।
इको-फ्रेंडली रिसॉर्ट्स: स्विट्जरलैंड की तर्ज पर केवल प्री-फैब्रिकेटेड इको-फ्रेंडली वुडन शैले (लकड़ी के पर्यावरण-अनुकूल घर) बनाए जाएंगे।
मालिकाना हक सुरक्षित: लद्दाख और कश्मीर में बाहरी कंपनियों को सीधे जमीन बेचने के बजाय लीज मॉडल अपनाया जाएगा, ताकि जमीन का मालिकाना हक स्थानीय लोगों के पास ही रहे।
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पलायन पर रोक: युवाओं के लिए रोजगार का नया सवेरा
सालभर रोजगार: सर्दियों के 6 महीने भारी बर्फबारी के कारण कारगिल, द्रास और घाटी के युवाओं को दिल्ली-चंडीगढ़ पलायन करना पड़ता था, जो अब रुकेगा।
विंटर टूरिज्म से बूस्ट: सर्दियों में जब दुनिया भर के कॉर्पोरेट घराने यहाँ अपनी सालाना बैठकें और सेमिनार करेंगे, तो स्थानीय बिजनेस चमक उठेगा।
इन्हें मिलेगा सीधा फायदा: स्थानीय गाइड्स, होटल मैनेजमेंट, लक्ज़री ट्रांसपोर्ट के साथ-साथ पारंपरिक हस्तशिल्प (कांगड़ी, पश्मीना, अखरोट की लकड़ी की नक्काशी) और एडवेंचर स्पोर्ट्स को नए बाजार मिलेंगे।
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