दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर बनेगा देश का पहला हेलीकॉप्टर कॉरिडोर

-हादसों में घायलों को मुफ्त में एयरलिफ्ट कर पहुंचाया जाएगा अस्पताल
नई दिल्ली, शिवानी सिंह
भारत के सबसे लंबे और आधुनिक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर सफर अब न सिर्फ रफ्तार बल्कि अचूक सड़क सुरक्षा की गारंटी भी बनने जा रहा है। केंद्र सरकार इस पर देश का पहला समर्पित हेलीकॉप्टर कॉरिडोर बनाने जा रही है। इस हेली इमरजेंसी मेडिकल सर्विस (एचईएमएस) के तहत घायलों को गोल्डन ऑवर में एयर एम्बुलेंस से लिफ्ट कर सीधे अस्पतालों तक पहुंचाया जाएगा। आम जनता के लिए यह लाइफ-सेविंग हवाई सुविधा पूरी तरह मुफ्त रहेगी।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों के बीच पिछले हफ्ते की बैठक में अंतिम मुहर लगा दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत 1386 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेस-वे के किनारे 80 से 100 किलोमीटर की दूरी पर आधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस हेलीपैड और छोटे एयरोड्रोम बनाए जाएंगे।
परियोजना सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी मॉडल) के तहत लागू की जाएगी, जहां इन्फ्रास्ट्रक्चर सरकार देगी और संचालन निजी विमानन कंपनियां करेंगी। पहले चरण में दिल्ली-दौसा-लालसोट सेक्शन के पास दिसंबर 2026 तक योजना को लागू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके तहत इस साल के अंत तक इसका ट्रायल और आंशिक परिचालन शुरू कर दिया जाएगा।
घायलों को एयरलिफ्ट अस्पताल पहुंचाने के लिए कोई फीस नहीं होगी। इसका भुगतान एनएचएआई रोड सेफ्टी फंड से करेगा। हालांकि इस पूरे एयर कॉरिडोर के परिचालन का वित्तीय मॉडल तैयार कर लिया गया है। इसके लिए दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर तीन से पांच फीसदी (15-25 रुपये) टोल टैक्स में मामूली बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव है।
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हेलीपैड्स का निर्माण एक्सप्रेस-वे के एंट्री और एग्जिट पॉइंट्स के ठीक पास किया जाएगा। दुर्घटना होने पर हाईवे पेट्रोलिंग टीम घायलों को हेलीपैड तक पहुंचाएगी, जहां से एयर एम्बुलेंस का दिल्ली, जयपुर, अहमदाबाद और मुंबई के प्रमुख सरकारी व निजी अस्पतालों (जैसे एम्स, मेदांता, अपोलो) के साथ सीधा नेटवर्क होगा। कई अस्पतालों में पहले से ही हेलीपैड मौजूद हैं, जबकि अन्य में इसे तेजी से विकसित किया जा रहा है।
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सरकार उक्त सेवा को गंगा एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे और लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे, दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेस-वे लागू करने का प्रस्ताव है। इसके अलावा ऋषिकेश एम्स में पहले से चल रहे देश के एचईएमएस पायलट प्रोजेक्ट को अब पूरे चारधाम यात्रा मार्ग (ऋषिकेश-बद्रीनाथ-केदारनाथ हाईवे) के एयर कॉरिडोर से जोड़ने की तैयारी है।
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सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1.77 लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं। इसमें कुल ट्रामा (गंभीर चोट) मौतों में से कम से कम 30 प्रतिशत मौतें (53,000) केवल इसलिए होती हैं क्योंकि मरीजों को गोल्डन आवर में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पाती है। समय पर इलाज मिलने की स्थित में घायलों की 80 प्रतिशत तक जान बचाने की संभावना बढ़ जाती है।
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जापान: जापान में एक्सप्रेस-वे के किनारे डॉक्टर-हेली नेटवर्क बीते दो दशकों से संचालित है। वहां हाईवे पर दुर्घटना की सूचना मिलते ही डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ से लैस हेलीकॉप्टर सीधे घटनास्थल उतरकर मरीज का प्राथमिक इलाज शुरू कर देते हैं।
चीन : चीन में 2018-19 से शंघाई और पर्ल रिवर डेल्टा जैसे व्यस्त आर्थिक एक्सप्रेस-वे के किनारे लो-एल्टीट्यूड कॉरिडोर बनाए हैं, जहां से ट्रैफिक जाम की स्थिति में गंभीर मरीजों को एयरलिफ्ट किया जाता है।
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