खुशखबरी : देशभर के 80 से ज्यादा टोल प्लाजा समाप्त किए जाएंगे

टोल प्लाजा

नई दिल्ली, अतुल सिंह – सोनू
देश के नेशनल हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों वाहन चालकों के लिए यह राहत भरी खबर है। सरकार की एक आंतरिक ऑडिट 2026 में यह खुलासा हुआ है कि देश भर में लगभग 80 से अधिक प्लाजा ऐसे हैं, जिनकी पूंजीगत लागत पूरी हो चुकी है अथवा वह 60 किलोमीटर के भीतर गलत तरीके से जनता से अवैध वसूली कर रहे हैं। सरकार ने नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे उक्त टोल प्लाजा को एक अक्तूबर से समाप्त करने का फैसला कर किया है।

सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों ने बताया उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, उत्तराखंड सहित दक्षिण भारत के कई टोल ऑपरेटर 60 प्रतिशत टोल माफी से बचने के लिए चालाकी करते हैं। राजमार्ग परियोजना की पूंजीगत लागत (कैपिटल कास्ट) वसूल होने वाली होती है तब मंत्रालय को एक नया प्रस्ताव भेज देते हैं कि सेक्शन पर नया फ्लाईओवर, एक अंडरपास या कुछ किलोमीटर की अतिरिक्त सर्विस लेन बनाने की जरुरत है। इस नए निर्माण की लागत को पुरानी लागत में जोड़ दिया जाता है। इसके बहाने वे कागजों पर यह दिखा देते हैं कि कुल पूंजीगत निवेश अभी पूरा नहीं हुआ है। इस तरह वे दशकों तक जनता से पूरा 100 फीसदी टोल वसूलते रहते हैं।

मंत्रालय की आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट में इसी चालाकी को पकड़ा है। इसके अलावा 60 किमी की दूरी के नियम को ताक पर रखकर सब-टोल चलाए जा रहे हैं जबिक सरकारी नियम के मुताबिक राजमार्ग टोल प्लाजा के बीच कम से कम 60 किलोमीटर की दूरी होनी अनिवार्य है। ऑडिट में पाया गया कि ये तकनीकी रूप से अवैध हैं और बिना किसी कानूनी मंजूरी के चलाए जा रहे हैं। इसके अलावा ऑपरेटर पुराने मुकदमों, घाटे का हवाला देकर या स्थानीय एनएचएआई अधिकारियों की मिलीभगत से अंतिम तारीख बीत जाने के महीनों बाद भी अवैध रूप से पूरा टोल वसूलते रहते हैं। आम जनता को अनुबंध की अंतिम तारीख पता नहीं होती, इसलिए वह भुगतान करते रहते हैं। संसद से लेकर सड़क तक दूरी के नियमों के उल्लंघन और लागत वसूली के बाद भी पूरा टैक्स वसूलने के आरोप लगते रहे हैं।
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बॉक्स
चरण 1 (अक्टूबर 2026): पहले चरण में उन 35 टोल प्लाजा को हटाया जाएगा, जिनका कंसीशन पीरियड (अनुबंध) पूरा हो चुका है और जो पूरी तरह से अवैध श्रेणी में आ चुके हैं।
चरण 2 (दिसंबर 2026 ): मंत्रालय ने 31 दिसंबर 2026 की अंतिम समय-सीमा तय की है। इस तारीख तक उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली-एनसीआर समेत देश के सभी 80 चिह्नित टोल प्लाजा समाप्त करने का लक्ष्य रखा है।
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-दिल्ली-हरियाणा को जोड़ने वाले केएमपी के कनेक्टिंग लूप्स टोल प्लाजा इस ऑडिट के मुख्य निशाने पर हैं।
-दीदारगंज-फतुहा के पास (पटना-बख्तियारपुर सेक्शन – एनएच-30) रूट पर राजधानी के बेहद करीब होने के कारण दूरी के नियमों और सब-टोलिंग को लेकर स्थानीय लोगों ने अदालत और विभाग में शिकायतें दर्ज करायी हैं।
-मुजफ्फरपुर-बरौनी और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाले कुछ विशिष्ट राष्ट्रीय राजमार्ग।
-छिजारसी टोल प्लाजा (एनएच-24) हापुड़-मुरादाबाद रूट पर ब्रजघाट और उसके आसपास के छोटे कलेक्शन पॉइंट्स को लेकर हमेशा विवाद रहा है क्योंकि ये निर्धारित दूरी के नियमों पर नहीं चल रहे हैं।
-कानपुर-फतेहपुर-इलाहाबाद रूट इस राजमार्ग (एनएच-2) के चौड़ीकरण के दौरान पुराने स्थापित टोल और नए बाईपास टोल के बीच की दूरी कई जगह 45 से 50 किलोमीटर ही रह गई है, जो ऑडिट के रडार पर सबसे ऊपर हैं।
-दिल्ली-देहरादून हाईवे और कुमाऊं-गढ़वाल को जोड़ने वाले मैदानी इलाकों के प्रवेश द्वार। यहाँ पर्यटन सीजन में लगने वाले भारी जाम और 60 किमी के दायरे के भीतर बने उप-टोल बूथों को पूरी तरह से बंद करने की सूची में डाला गया है।
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