नई दिल्ली। शिवानी सिंह
भारतीय रेलवे ने स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल रेल परिवहन की दिशा में बड़ी पहल करते हुए देश की पहली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) आधारित ट्रेन की शुरुआत कर दी है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती रेलवे स्टेशन से इस ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद रहे। इसके साथ ही साबरमती में 1,542 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न रेल परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया गया।
देश में पहली बार किसी ट्रेन की ड्राइविंग पावर कार (डीपीसी) में एलएनजी आधारित ईंधन प्रणाली का इस्तेमाल किया गया है। साबरमती स्थित एकीकृत कोचिंग डिपो में 1,400 अश्वशक्ति क्षमता वाली दो ड्राइविंग पावर कारों को डीजल और एलएनजी से चलने वाली दोहरी ईंधन प्रणाली में बदला गया है। इस तकनीक से ट्रेन में इस्तेमाल होने वाले डीजल की करीब 40 फीसदी खपत को एलएनजी से बदला जा सकेगा।
रेलवे ने ट्रेन को परिचालन में उतारने से पहले 2,000 किलोमीटर से अधिक का मैदानी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया है। परीक्षण के आंकड़ों के मुताबिक एक ड्राइविंग पावर कार से सालाना करीब 11.9 लाख रुपये, जबकि आठ डिब्बों वाली पूरी ट्रेन से करीब 23.9 लाख रुपये के ईंधन खर्च की बचत होने का अनुमान है। एलएनजी के इस्तेमाल से कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और सूक्ष्म कणों के उत्सर्जन में भी कमी आने की उम्मीद है।
उद्घाटन के दौरान आठ डिब्बों वाली गैर-वातानुकूलित कुर्सीयान ट्रेन को साबरमती से महेसाणा के बीच चलाया गया। हालांकि, इस ट्रेन का नियमित मार्ग अभी तय नहीं किया गया है। रेलवे की ओर से इसके नियमित परिचालन मार्ग की घोषणा बाद में की जाएगी।
404 किलोमीटर रेलमार्ग पर लगेगा स्वदेशी ‘कवच’
रेल सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अहमदाबाद मंडल के 404 किलोमीटर रेलमार्ग पर स्वदेशी ‘कवच’ ट्रेन सुरक्षा प्रणाली लगाने की परियोजना का भी शिलान्यास किया गया। इस पर करीब 411 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसके तहत अहमदाबाद-पालनपुर के 157 किलोमीटर और अहमदाबाद-सामाखियाली के 247 किलोमीटर रेलखंड को कवच से लैस किया जाएगा। यह प्रणाली ट्रेनों की टक्कर रोकने, निर्धारित सीमा से अधिक गति होने पर सुरक्षा प्रदान करने और मानवीय भूल से होने वाले हादसों का खतरा कम करने में मदद करती है।
122.57 किलोमीटर रेलखंड पर स्वचालित सिग्नल प्रणाली
अहमदाबाद मंडल में 122.57 किलोमीटर रेलखंड पर स्वचालित ब्लॉक सिग्नल प्रणाली की भी शुरुआत की गई है। करीब 118.83 करोड़ रुपये की लागत वाली यह व्यवस्था साबरमती-कलोल-भांडू मोतीदाऊ और साबरमती-साणंद-जखवाड़ा रेलखंड पर लागू की गई है। इससे ट्रेनों के बीच सुरक्षित दूरी बनाए रखने के साथ एक ही रेलमार्ग पर अधिक ट्रेनों का सुचारू संचालन करने में मदद मिलेगी और रेलखंड की क्षमता बढ़ेगी।
साबरमती में 700 करोड़ का वैग-12 इंजन रखरखाव शेड
अमित शाह ने साबरमती में करीब 700 करोड़ रुपये की लागत से तैयार वैग-12 विद्युत इंजन रखरखाव शेड का भी उद्घाटन किया। यहां 300 उच्च अश्वशक्ति वाले वैग-12 विद्युत इंजनों के रखरखाव की सुविधा होगी। करीब 12,000 अश्वशक्ति क्षमता वाले इन इंजनों का इस्तेमाल भारी और लंबी मालगाड़ियों को खींचने के लिए किया जाता है। इस अवसर पर वैग-12 विद्युत इंजन को भी रवाना किया गया।
साबरमती-सरखेज रेल लाइन होगी दोहरी
साबरमती से सरखेज के बीच करीब 21 किलोमीटर रेल लाइन के दोहरीकरण की परियोजना भी शुरू की गई है। इस पर करीब 313.27 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इसे मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। परियोजना में साबरमती, गांधीनगर, वस्त्रापुर और सरखेज स्टेशन से जुड़े कार्यों के साथ पुल और सड़क के नीचे से गुजरने वाले मार्गों का निर्माण भी शामिल है। रेल लाइन के दोहरीकरण से यात्री और मालगाड़ियों का आवागमन सुगम होने तथा सरखेज-धोलेरा क्षेत्र की रेल संपर्क व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
