सड़क हादसों में देवदूत बने राहगीर, 5 साल में बचाईं 1500 जिंदगियां

राह-वीर योजना में यूपी देश में अव्व्ल, एमपी दूसरे स्थान पर

अनिल सिंह चौहान

नई दिल्ली, 10 अक्तूबर
सड़क दुर्घटनाओं के बाद शुरुआती बेहद नाजुक समय (गोल्डन आवर) में तत्परता दिखाकर आम नागरिक लगातार मिसाल कायम कर रहे हैं। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों (अक्टूबर 2021 से अक्टूबर 2026) के दौरान सड़क हादसों में घायल हुए 1,500 से अधिक लोगों को समय पर अस्पताल पहुँचाकर राहगीरों ने उनकी जान बचाई है। घायलों की त्वरित मदद कर जीवन रक्षा करने के इस मानवीय अभियान में उत्तर प्रदेश पूरे देश में शीर्ष पर रहा है, जबकि मध्य प्रदेश ने दूसरा स्थान हासिल किया है।

मंत्रालय की राह-वीर (गुड समैरिटन) योजना के तहत समय पर मदद पहुँचाने वाले नागरिकों को आर्थिक रूप से प्रोत्साहित किया जाता है। बीते पांच सालों में केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ऐसे मददगार नागरिकों को लगभग 2.50 करोड़ रुपये से अधिक की प्रोत्साहन राशि और प्रशस्ति-पत्र प्रदान किए गए हैं। मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक, योजना की शुरुआत में प्रति पीड़ित मदद पर प्रोत्साहन राशि 5,000 रुपये थी, जिसे वर्ष 2025 में बढ़ाकर 25,000 रुपये कर दिया गया है।

आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि उत्तर प्रदेश के यमुना, पूर्वांचल और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे जैसे प्रमुख मार्गों पर स्थानीय ग्रामीणों, यात्रियों और हाईवे पर स्थित ढाबा संचालकों ने हादसों के दौरान सबसे सक्रिय भूमिका निभाई। पिछले पांच सालों में राज्य में राहगीरों की मुस्तैदी से 650 से 700 से अधिक घायलों की जान बचाई जा सकी। वहीं, मध्य प्रदेश में इंदौर, भोपाल और ग्वालियर जैसे प्रमुख हाईवे रूटों पर 108 एम्बुलेंस और स्थानीय नागरिक नेटवर्क के बेहतर तालमेल से 450 से 500 से अधिक गंभीर घायलों को समय पर ट्रॉमा सेंटर पहुँचाया गया। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मोटर वाहन अधिनियम (धारा 134ए) के तहत घायलों की मदद करने वालों को पूर्ण कानूनी सुरक्षा प्राप्त है और उन्हें पुलिस या अदालत के किसी चक्कर का सामना नहीं करना पड़ता।
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साल में 5 बार तक मिल सकता है इनाम, फिर भी 80 फीसदी लोग नहीं करते आवेदन
राह-वीर योजना के तहत कोई भी नागरिक एक वर्ष में अधिकतम 5 हादसों में मदद करने पर प्रोत्साहन राशि का हकदार हो सकता है, यानी एक व्यक्ति सालाना 1.25 लाख तक की राशि प्राप्त कर सकता है। इसके अतिरिक्त, मंत्रालय हर वर्ष देश भर से चुने गए 10 सर्वश्रेष्ठ राह-वीरों को 1-1 लाख रुपये का विशेष राष्ट्रीय पुरस्कार भी प्रदान करता है। हालांकि, कानूनी पचड़ों के पुराने डर और प्रशासनिक प्रक्रिया की सही जानकारी न होने के कारण आज भी हादसों में मदद करने वाले 80 प्रतिशत से अधिक लोग इस इनाम के लिए आवेदन ही नहीं करते हैं।
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