संसदीय समितियों की शाही मेहमाननवाजी पर नकेल, फाइव-स्टार कल्चर खत्म

-सर्किट हाउस में रुकेंगे माननीय, गिफ्ट में मिलेगा पेन-डायरी

नई दिल्ली, अनिल सिंह चौहान

केंद्र सरकार ने संसदीय समितियों के दौरों और बैठकों के नाम पर सरकारी खजाने से होने वाली शाही मेहमाननवाजी पर पूरी तरह नकेल कस दी है। फाइव-स्टार होटलों में ठहरना, लग्जरी कारें, सरकारी खर्च पर पर्यटन और विदाई में चांदी के सिक्के या महंगे गैजेट्स देने की परंपरा को अब पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है। नए शुद्धि-पत्र के मुताबिक अब माननीय सदस्य केवल सरकारी गेस्ट हाउस, सर्किट हाउस या आईआरसीटीसी के बजट होटलों में ही रुकेंगे। इसके साथ ही सांसदों के खाने-पीने (कैटरिंग) के खर्च पर कैप (वित्तीय सीमा) लगाई गई है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 11 जून को अपने सभी सार्वजनिक उपक्रमों (पीएसयू) को नए शुद्धि पत्र के वित्तीय मानकों को सख्ती से लागू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक ये नए नियम केंद्र सरकार के सभी विभागों और पीएसयू पर समान रूप से लागू हो गए हैं। मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि संसदीय समितियों के अध्ययन दौरों का मूल उद्देश्य मौके पर जाकर देश की बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की प्रगति देखना, तकनीकी कमियों को पकड़ना और स्थानीय जनता से सीधा फीडबैक लेना है। लेकिन पीएसयू के अफसर परियोजनाओं की खामियों को छिपाने और चाटुकारिता के चलते अतिथिसत्कार के नाम पर सरकारी खजाना पानी की तरह बहाते रहे हैं।

पीएसयू के अफसरशाह सांसदों के ठहरने की व्यवस्था फाइव-स्टार होटल के सुइट्स और लग्जरी रिसॉर्ट्स में करते थे। स्वागत में महंगे शॉल, चांदी के सिक्के व इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बांटे जाते थे। हर सदस्य के लिए अलग से मर्सिडीज जैसी लग्जरी कारें तैनात रहती थीं और कैटरिंग के नाम पर 50 से अधिक व्यंजनों वाले शाही बुफे और प्राइवेट क्रूज में पार्टियां होती थीं। नए नियमों ने इस पूरी तस्वीर को बदल दिया है। माननीय सर्किट हाऊस, सरकारी गेस्ट हाऊस, आईआरसीटी के बजट होटल में ठहरेंगे। उपहार के नाम पर केवल प्रशासनिक किट डायरी-पेन ही दी जा सकेगी। यदि किसी अधिकारी ने तय सीमा से महज 10 फीसदी भी अधिक खर्च किया, तो उसकी सीधी जवाबदेही तय होगी और वसूली की जाएगी।
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कैग की आपत्ति के बाद खर्चो में 60 फीसदी की कटौती:
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई थी कि दौरों के दौरान करोड़ों रुपये के खर्च का एक बड़ा हिस्सा विविध खर्च के तहत दिखाया गया था, जिसका कोई ठोस रिकॉर्ड या रसीद नहीं थी। कैग की कड़ी आपत्ति के बाद अब विविध और आकस्मिक खर्चों के कुल बजट में 60 फीसदी की सीधी कटौती कर दी गई है। इसके अलावा दौरों पर सांसदों के साथ जाने वाले अधिकारियों की संख्या भी सीमित करके 3 से 5 कर दी गई है, ताकि करोड़ों की इस बर्बादी को पूरी तरह रोका जा सके।
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