नई दिल्ली, शिवानी सिंह
देश में राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेस-वे के निर्माण की नीति में बड़ा बदलाव करते हुए सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय ने जलवायु परिवर्तन और यातायात के भारी दबाव के आधार पर बिटुमेन (डामर) के विशेष प्रकार और ग्रेड का चयन अनिवार्य कर दिया है। नए मानकों के तहत लद्दाख की ठंड से लेकर राजस्थान की अत्यधिक गर्मी तक अलग-अलग इलाकों के लिए संशोधित बिटुमेन का उपयोग होगा। इस निर्णय से सड़कें मजबूत और टिकाऊ बनेंगी। गड्ढे नहीं पड़ेंगे से सड़क यात्रियों का सुरक्षित सफर बनेंगा। वहीं, मरम्मत कार्य पर करोड़ों रुपये खर्च नहीं होंगे।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने 23 अगस्त को इस बाबत विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि देश भर में जलवायु परिवर्तन, तापमान के उतार-चढ़ाव और वाहनों के भारी दबाव को ध्यान में रखकर ही अब सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत देश के अलग-अलग हिस्सों में सड़क निर्माण के लिए चार प्रमुख विस्कोसिटी ग्रेड (वीजी) वाले बिटुमेन और पॉलिमर मॉडिफाइड बिटुमेन (पीएमबी) का इस्तेमाल अनिवार्य कर दिया गया है।
उन्होंने बताया कि भारी ट्रैफिक और अत्यधिक गर्मी वाले मैदानी व औद्योगिक इलाकों (तापमान 45° सेल्सियस) के लिए वीजी-40 ग्रेड बिटुमेन और पीएमबी-64 की सिफारिश की गई है। इसकी मजबूती और चिपचिपाहट सामान्य डामर से कहीं अधिक होती है। इसके प्रयोग से 50 डिग्री सेल्सियस तक के पारे में भी डामर अपनी पकड़ नहीं छोड़ेगा, जिससे सड़क की सतह पर गड्ढे या दरारें नहीं पड़ेंगी। मध्यम तापमान और सामान्य व्यावसायिक ट्रैफिक वाले इलाकों के लिए वीजी-30 और वीजी-20 ग्रेड का चयन किया गया है। वहीं, ठंडे व पहाड़ी क्षेत्रों-जैसे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए वीजी-10 और सीआरएमबी (क्रंब रबर मॉडिफाइड बिटुमेन) का उपयोग होगा, जो शून्य से नीचे तापमान जाने पर भी सड़क को जमने और टूटने से बचाएगा। अत्यधिक बारिश वाले क्षेत्रों में पानी के रिसाव को रोकने के लिए स्पेशल एंटी-स्ट्रिपिंग एजेंट युक्त बिटुमेन का उपयोग होगा, जिससे बारिश का पानी सड़क की नींव तक पहुंचकर उसे कमजोर न कर सके।
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बॉक्स
लंबी उम्र: वर्तमान में इस्तेमाल होने वाले सामान्य बिटुमेन की सड़कें 3 से 5 साल में खराब हो जाती हैं, लेकिन नए मॉडिफाइड ग्रेड्स से बनी सड़कों की उम्र बढ़कर 10 से 15 साल हो जाएगी।
ईंधन की बचत: सड़कों के चिकने और गड्ढा-मुक्त रहने से वाहनों की आवाजाही सुगम होगी, जिससे गाड़ियों के ईंधन की खपत में 5 से 7 फीसदी की बचत होगी।
सुरक्षित सफर: सड़कों के न टूटने से अचानक होने वाले सड़क हादसों में बड़ी कमी आएगी।
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नए मानक से शुरुआती सड़क निर्माण लागत में करीब 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी होगी, लेकिन इससे सड़कों की मरम्मत और रखरखाव पर होने वाले खर्च में 50 फीसदी तक की भारी कमी आएगी।
लंबी उम्र : वर्तमान में इस्तेमाल होने वाले सामान्य बिटुमेन की सड़कें 3 से 5 साल में खराब हो जाती हैं, लेकिन नए मॉडिफाइड ग्रेड्स से बनी सड़कों की उम्र बढ़कर 10 से 15 साल हो जाएगी।
ईंधन की बचत: सड़कों के चिकने और गड्ढा-मुक्त रहने से वाहनों की आवाजाही सुगम होगी, जिससे गाड़ियों के ईंधन की खपत में 5 से 7 फीसदी की बचत होगी।
सुरक्षित सफर: सड़कों के न टूटने से अचानक होने वाले सड़क हादसों में बड़ी कमी आएगी।
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नए मानक से शुरुआती सड़क निर्माण लागत में करीब 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी होगी, लेकिन इससे सड़कों की मरम्मत और रखरखाव पर होने वाले खर्च में 50 फीसदी तक की भारी कमी आएगी।