Advocate Reena की स्मृति में तीस हजारी कोर्ट में रोपा गया उम्मीद का पौधा

दिल्ली के अधिवक्ताओं ने दिवंगत साथी को दी भावभीनी श्रद्धांजलि, बढ़ते प्रदूषण के बीच वृक्षारोपण को बताया समय की आवश्यकता
अनिल सिंह चौहान
ई दिल्ली।
दिवंगत अधिवक्ता रीना की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से दिल्ली के अधिवक्ताओं ने तीस हजारी न्यायालय परिसर में पौधारोपण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली बार एसोसिएशन कार्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में पौधा रोपकर दिवंगत साथी की स्मृतियों को संजोने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ हवा का संदेश भी दिया गया। कार्यक्रम का आयोजन अधिवक्ता देवेश वट्टा, अधिवक्ता शुभम सोनकर और अधिवक्ता मनोज सोनकर द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। इस अवसर पर दिल्ली बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों, पूर्व पदाधिकारियों और बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं ने उपस्थित होकर दिवंगत अधिवक्ता रीना को श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम में दिल्ली बार एसोसिएशन के सचिव अधिवक्ता विकास गोयल, दिल्ली बार एसोसिएशन के अतिरिक्त सचिव पद के चुनाव में प्रत्याशी अधिवक्ता वैभव तोमर तथा दिल्ली बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अधिवक्ता जयवीर सिंह चौहान सहित अन्य अधिवक्ताओं ने भाग लिया। पौधा नहीं, स्मृतियों का जीवंत स्मारक, अधिवक्ता रीना की स्मृति में न्यायालय परिसर में लगाया गया यह पौधा महज एक पौधा नहीं, बल्कि उनके पेशेवर जीवन और अधिवक्ता समुदाय के साथ उनके जुड़ाव का जीवंत प्रतीक है। जिस न्यायालय परिसर में उन्होंने अपने अधिवक्ता जीवन का महत्वपूर्ण समय बिताया, वहीं अब यह पौधा बढ़ते हुए उनकी यादों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। समय के साथ जब यह पौधा विशाल वृक्ष का रूप लेगा, तब उसकी छांव केवल प्रकृति की शीतलता नहीं देगी, बल्कि दिवंगत अधिवक्ता रीना के प्रति अधिवक्ता समुदाय के सम्मान और स्नेह की कहानी भी कहेगी। बढ़ते प्रदूषण के दौर में वृक्षारोपण की बढ़ी अहमियत, राजधानी दिल्ली सहित देश के महानगरों में बढ़ता वायु प्रदूषण गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। वाहनों का बढ़ता दबाव, निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल, औद्योगिक गतिविधियां और कचरा जलाने जैसी गतिविधियां पर्यावरण की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही हैं।
ऐसे समय में वृक्षारोपण महज एक पर्यावरणीय अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के स्वस्थ भविष्य से जुड़ा सामाजिक दायित्व है। पेड़ कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करने, वायु गुणवत्ता में सुधार, धूल-कणों को रोकने, तापमान नियंत्रित करने और शहरी हरित क्षेत्र बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दिल्ली जैसे घनी आबादी वाले महानगर में लगाया गया प्रत्येक पेड़ पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण योगदान है। ऐसे में किसी दिवंगत व्यक्ति की स्मृति में पौधा लगाना श्रद्धांजलि की ऐसी पहल बन जाता है, जिसमें भावनाओं के साथ प्रकृति और समाज के प्रति जिम्मेदारी भी जुड़ जाती है। प्रदूषण का असर मानव जीवन के साथ जैव विविधता पर भी
वायु प्रदूषण का प्रभाव केवल मानव स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। खराब वायु गुणवत्ता, घटते हरित क्षेत्र और प्राकृतिक आवासों में कमी का असर पशु-पक्षियों और शहरी जैव विविधता पर भी पड़ता है। ऐसे में शहरों में अधिक से अधिक पौधे लगाना और पहले से मौजूद वृक्षों की रक्षा करना बेहद जरूरी है। वृक्ष पक्षियों को आश्रय देने के साथ-साथ शहरी तापमान को नियंत्रित करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाते हैं।
प्रदूषण बढ़ने से स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बढ़ता है दबाव, वायु प्रदूषण का सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। प्रदूषित हवा से सांस संबंधी बीमारियों, एलर्जी, अस्थमा और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। बच्चों और बुजुर्गों के साथ-साथ पहले से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे लोगों पर इसका असर अधिक पड़ सकता है। प्रदूषण बढ़ने पर अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों का दबाव भी बढ़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं के संसाधनों पर अतिरिक्त भार पड़ता है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार या संबंधित विभागों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति का सामूहिक दायित्व है।”अधिवक्ता का दायित्व सिर्फ अदालत तक सीमित नहीं’, इस अवसर पर अधिवक्ता देवेश वट्टा ने कहा कि एक अधिवक्ता का दायित्व केवल न्यायालय के भीतर पेशेवर जिम्मेदारियां निभाने तक सीमित नहीं है। अपने साथी अधिवक्ताओं के सुख-दुःख में खड़ा होना और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी अधिवक्ता समुदाय की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दिवंगत अधिवक्ता रीना की स्मृति में लगाया गया यह पौधा आने वाले समय में वृक्ष का रूप लेगा और उनकी यादों को जीवित रखने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देता रहेगा। अधिवक्ता समुदाय ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, कार्यक्रम में उपस्थित अधिवक्ताओं ने कहा कि बार केवल न्यायालय में कानूनी दायित्व निभाने वाला समुदाय नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा परिवार है जो अपने साथी अधिवक्ताओं के सुख-दुःख में साथ खड़ा होता है। दिवंगत अधिवक्ता रीना की स्मृति में पौधारोपण इसी सामूहिक संवेदना का प्रतीक है। इस पहल के माध्यम से अधिवक्ताओं ने यह संदेश भी दिया कि सामाजिक सरोकारों से जुड़ना और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रयास करना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
एक पौधा, दो संदेश, तीस हजारी न्यायालय परिसर में आयोजित इस पहल ने समाज को दो महत्वपूर्ण संदेश दिए। पहला—दिवंगत साथियों की स्मृतियों और उनके योगदान को सम्मानपूर्वक जीवित रखना और दूसरा—बदलते पर्यावरणीय हालात के बीच प्रकृति की रक्षा के लिए आगे आना। आयोजकों अधिवक्ता देवेश वट्टा, अधिवक्ता शुभम सोनकर और अधिवक्ता मनोज सोनकर ने कार्यक्रम में सहयोग देने वाले दिल्ली बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों, सदस्यों और सभी अधिवक्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। तीस हजारी न्यायालय परिसर में रोपा गया यह पौधा आने वाले वर्षों में जब एक विशाल वृक्ष का रूप लेगा, तो उसकी छांव में खड़े लोग दिवंगत अधिवक्ता रीना को याद करने के साथ यह संदेश भी महसूस करेंगे कि किसी अपने की स्मृति में लगाया गया एक पौधा भी आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन, पर्यावरण और उम्मीद का संदेश बन सकता है।